Friday, November 16

Art And Culture

Culture of bastar chhattisgarh

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Tribals of Bastar :  The land of tribes and about 70% of the total population of Bastar comprises tribals, which is 26.76% of the total tribal population of Chhattisgarh. The major tribes of the Bastar region are the Gond, Abhuj Maria, Bhatra Bhatra are divided into Sub Cast San Bhatra, Pit Bhatra, Amnit Bhatra Amnit Hold Highest Status, Halbaa, Dhurvaa, Muria and Bison Horn Maria.  The tribes of Bastar region are known for their unique and distinctive tribal culture and heritage in all over the world.  The Gonds of Bastar are one of the most famous tribes in India, known for their unique Ghotul system of marriages. Gonds are also the largest tribal group of central India in terms of opulation. Each tribe has developed its own dialects and differs from each other in their costume, eating
Muria Dance

Muria Dance

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The Murias are the people who belong to the Muria Tribe and reside in the Northern part of Bastar district. The Murias are trained and taught several community dances in the Ghotul. As per the culture and tradition of this clan, the Murias first worship their drum before performing the dance. They basically dance and sing during some occasion and festivals. A colourful picture of the performing arts of Madhya Pradesh can be observed during marriages in the household of the clan. Before performing any dance or song the Murias pray to the 'Lingo Pen', who is the founder of the Ghotul institution and is regarded as the phallic deity of the tribe.
धोकरा धातु कला  – छत्तीसगढ़ की 4000 साल पुरानी आदिवासी मूर्तिकला

धोकरा धातु कला – छत्तीसगढ़ की 4000 साल पुरानी आदिवासी मूर्तिकला

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धोकरा धातु कला छत्तीसगढ़ राज्य की एक लोकप्रिय मूर्तिकला है l मुख्यतः धोकरा धातु कला राज्य के बस्तर और रायगढ़ जिले में प्रचिलित है I धोकरा धातु कला का नाम वहाँ के आदिवासी समुदाय डामर के नाम पर पड़ा है l धोकरा कला 4000 वर्ष पुरानी भारतीय कला है जो आज भी निरंतर जारी है l इस कला का प्रमाण मोहेंन्जो दरो और हड़प्पा की सभ्यता के अध्यन में भी पाया गया है l भारत के अलावा धोकरा धातु कला का प्रमाण चीन , नाइजीरिया , इजिप्ट , मलेशिया और मध्य अमेरिका के इतहास में भी पाया गया है l धोकरा धातु कला में भ्रष्‍ट मोम (lost wax) , पीतल , कांस्य और ताम्बे की मिश्रित धातु का इस्तमाल किया जाता है l पिघले धातु की ढलाई से अक्रुतियां तैयार की जाती है l क्षेत्र के आदिवासी कलाकार धोकरा कला से विभिन्न प्रकार के आकृतिया बनाते है l जिसमे कई प्रकार के पशुओ की मुर्तिया , धातु की घंटिया और अन्य आकर्षित करने वाली आकृति
भारत की आदिवासी कलाओ में बस्तर की कला प्रसिद्ध है

भारत की आदिवासी कलाओ में बस्तर की कला प्रसिद्ध है

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बस्तर के आदिवाशी समुदाय अपनी इस दुर्लभ दुर्लभ कला को पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित करते आ रहे है, परन्तु प्रचार के आभाव में यह केवल उनके कुटीरों से साप्ताहिक हाट बाज़ारों तक ही सीमित है। उनकी यह कला बिना किसी उत्कृष्ट मशीनों के उपयोग के रोजमर्रा के उपयोग में आने वाले उपक्रमों से ही बनाये जाते हैं। बस्तर के कला कौशल को मुख्या रूप से काष्ठ कला, बाँस कला, मृदा कला, धातु कला में विभाजित किया जा सकता है। काष्ठ कला में मुख्य रूप से लकड़ी के फर्नीचरों में बस्तर की संस्कृति, त्योहारों, जीव जंतुओं, देवी देवताओं की कलाकृति बनाना, देवी देवताओं की मूर्तियाँ, साज सज्जा की कलाकृतियाँ बनायी जाती है। बांस कला में बांस की शीखों से कुर्शिया, बैठक, टेबल, टोकरियाँ, चटाई, और घरेलु साज सज्जा की सामग्रिया बनायीं जाती है। मृदा कला में , देवी देवताओं की मूर्तियाँ, सजावटी बर्तन, फूलदान, गमले, और घरेलु साजसज्जा की सामग्रि