Thursday, June 21

Bastar Band

Economy  of bastar chhattisgarh

Economy of bastar chhattisgarh

Bastar Band, Education
Agriculture: The usage of traditional agricultural implements has lowered the production of agriculture. The kharif crops grown here are paddy, urad, arhar, jowar and maize. The rabi crops include til, alsi, moong, mustard and gram. Collection and sale of forest produce and other forest-related work supplements meager agricultural incomes. The pattern of livelihood in Bastar continues to be dictated by tradition. Even today, agricultural practices are traditional. Use of wooden ploughs is overwhelming while the number of iron ploughs is negligible. The same is true of bullock carts. The number of tractors is negligible while the bullock carts are all pervasive. Forest Produce: Forests play an important role in the lives of the people, providing food security and livelihood through t...

Culture of bastar chhattisgarh

Art, Art And Culture, Bastar Band, Uncategorized
Tribals of Bastar :  The land of tribes and about 70% of the total population of Bastar comprises tribals, which is 26.76% of the total tribal population of Chhattisgarh. The major tribes of the Bastar region are the Gond, Abhuj Maria, Bhatra Bhatra are divided into Sub Cast San Bhatra, Pit Bhatra, Amnit Bhatra Amnit Hold Highest Status, Halbaa, Dhurvaa, Muria and Bison Horn Maria.  The tribes of Bastar region are known for their unique and distinctive tribal culture and heritage in all over the world.  The Gonds of Bastar are one of the most famous tribes in India, known for their unique Ghotul system of marriages. Gonds are also the largest tribal group of central India in terms of opulation. Each tribe has developed its own dialects and differs from each other in their costume, eating
तमारा घुमर झरना की  भव्य प्राकृतिक सुन्दरता

तमारा घुमर झरना की भव्य प्राकृतिक सुन्दरता

Bastar Band, Place to Visit, water fall
तमारा घूमर फॉल्स एक  प्राकृतिक और खूबसूरत झरना है,जो चित्रकूट के नजदीक एक प्राकृतिक स्थान है। इस खूबसूरत जंगली भूमि, गहरी घाटियों और शानदार पहाड़ियों की प्राकृतिक सुंदरता इस जगह की सुंदरता को बढाती है और पर्यटकों की ओर आकर्षित करती है। यह एक हाल ही में खोज किया गया झरना 100 फीट से अधिक की ऊंचाई है तमारा घूमर झरना जगदलपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित है।  इस झरने के दोनों तरफ हरे मैदान हैं चित्रकूट और तिरथगढ़ झरने की तरह है। झरने के आसपास के क्षेत्र प्राकृतिक आकर्षणों में समृद्ध है और इस जगह की खोज करने का सबसे अच्छा तरीका ट्रैकिंग या लॉन्ग ड्राइव किया जा सकता है।रायपुर बस्तर की खोज करने के लिए सबसे सुविधाजनक स्थान है क्योंकि यह आसानी से दिल्ली और नागपुर से रेल के साथ जुड़ा हुआ है। सभी स्थानों पर बस सेवाएं रायपुर से उपलब्ध हैं।बस्तर की सबसे निकटतम हवाई अड्डा रायपुर, जगदलपुर से 300 किमी दूर

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान

Bastar Band, Place to Visit
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिला से मात्र 27  किमी की दूरी पर स्थित है। कांगेर नदी इसके बीचो-बीच इठलाती हुई चलती है। इसकी औसत चौडाई 6  किमी एवं लम्बाई 48  किमी है।  इसकी सीमा 48  गाँवों से घिरी है।इस राष्ट्रीय उद्यान मे कई प्रकार की वन प्रजातियां मिलती है। जिससे यहां के वनो की विविधिता बढती है। जिसमे  दक्षिणी पेनिनसुलर मिक्स्ड डेसिहुअस बन, आर्ड सागौन, वन-इनमे साल, बीजा, साजा, हल्दु, चार, तेंदु कोसम, बेंत, बांस एवं कई प्रकार के वनौषधि पौधे मिलते है। हां वन्य प्राणियों के साथ साथ कई रंग-बिरंगी चिडियाअं उडते हुये दिख जाती है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय पार्क भारत  के सर्वाधिक सुंदर और मनोहारी नेशनल पार्कों में से एक है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता और अनोखी समृद्ध जैव विविधता के कारण प्रसिद्ध है। कांगेर घाटी नेशनल पार्क में पाए जाने वाले प्रमुख जीव जंतु हैं:  चीते, माउस डीयर
छत्तीसगढ़ बस्तर के दशहरा की अनोखी परंपरा

छत्तीसगढ़ बस्तर के दशहरा की अनोखी परंपरा

Bastar Band, Temple
  बस्तर के आदिवासियों की अभूतपूर्व भागीदारी का ही प्रतिफल है कि बस्तर दशहरा की राष्ट्रीय पहचान स्थापित हुई। आदिवासियों ने इसके प्रारंभिक काल से ही बस्तर के राजाओं को हर प्रकार से सहयोग प्रदान किया। जिसका यह परिणाम निकला कि बस्तर दशहरा का विकास एक ऐसी परंपरा के रूप में हुआ जिसका सिर्फ़ आदिवासी समुदाय ही नहीं समस्त छत्तीसगढ़वासी गर्व करते हैं। इस पर्व में अन्नदान पशुदान और श्रमदान की जो परंपरा विकसित हुई उससे साबित होता है कि हमारे समाज में सामुदायिक भावना की बुनियाद अत्यंत मज़बूत है। भूतपूर्व बस्तर राज्य में परगनिया माझी, माँझी मुकद्दम और कोटवार आदि ग्रामीण दशहरे की व्यवस्था में समय से पहले ही मनोयोग से ही जुट जाया करते थे। प्रतिवर्ष दशहरा पर्व के लिए परगनिया माझी अपने अपने परगनों से सामग्री जुटाने का प्रयत्न करते थे। सामग्री जुटाने का काम दो तीन महीने पहले से होने लगता था।
बस्तर के इस देशी थर्मस का पानी पीने से कई बीमारियां हो जाती है दूर

बस्तर के इस देशी थर्मस का पानी पीने से कई बीमारियां हो जाती है दूर

Bastar Band
बस्तर के देसी थर्मस के नाम से जाना जाने वाला तुमा आज-कल कम देखने को मिल रहा है। बस्तर के आदिवासी पहले साल भर तुमा का उपयोग करते थे। लेकिन बदले समय के साथ आदिवासियों के रहन सहन में भी बदलाव आ गया है। जिसके चलते गर्मी आने के बावजूद तुमा न के बराबर दिख रहे हैं। तुमा पेय पदार्थ रखने का पात्र है, जिसका उपयोग बस्तर के ग्रामीण करते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी होता है। ग्रामीणों के अनुसार इसमें रखा गया पेय पदार्थ ठंडक के साथ-साथ इसकी पौष्टिकता और शुद्धता को भी बनाए रखता है। तुमा लौकी से बनाया जाता है। ग्रामीण सबसे पहले यह देखते है कि कौन सी लौकी तुमा बनाने लायक है। तुमा के लिए लौकी का निचला हिस्सा गोल होना जरूरी होता है। गोल लौकी को पेड़ में ही पकने के लिए छोड़ दिया जाता है। लौकी पकने के बाद इसे पेड़ से तोड़ लिया जाता है। इसके बाद लौकी के ऊपरी हिस्से को काट कर अंदर का गुदा बाहर निकाल द

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Bastar Band, Education, Uncategorized
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सारा छत्तीसगढ़ देखा लेकिन बस्तर का चित्रकोट जलप्रपात नहीं देखा तो क्या देखा

सारा छत्तीसगढ़ देखा लेकिन बस्तर का चित्रकोट जलप्रपात नहीं देखा तो क्या देखा

Bastar Band
बस्तर छत्तीसगढ़ एक बहुत ही सुन्दर स्थान है | इसे छत्तीसगढ़ का कश्मीर भी कहते है | आपने भले ही सारा छत्तीसगढ़ देख लिया हो, लेकिन बस्तर का चित्रकूट जल प्रपात नहीं देखा तो क्या देखा | जगदलपुर से लगभग ४० किलोमीटर दूर इंद्रावती नदी का यह चित्रकूट जलप्रपात की तस्वीर किसी को भी रोमांचित कर देगी |छत्तीसगढ़ के इस जलप्रपात को देखने के लिए यहाँ काफी सैलानी हर साल पहुचते है |
Bastar Band

Bastar Band

Bastar Band
The group has so far given nearly 50 presentations through out the country. The objective of the Bastar Band is Banduk chhodo-Dhol pakdo, which means throw guns and hold drums, because gun destroys where as drum expands the life. The Bastar Band members says that risk is there in any work, so if risk is related to a good cause like using music for social therapy the risk must be accepted, and the group has done. The presentation of Bastar Band has been widely acclaimed through out the country. It is given performance in all the corners of the country as well among the dignitaries including Hon’ble President of India, Hon’ble Governor, Chief Minister and Several Ministers and officers of Chhattisgarh and some other states. It has also participated in renowned cultural festivals in various p
Bastart Band

Bastart Band

Bastar Band
In the performances, the Bastar Band recites nearly more than 30 styles of tunes in accompaniment of 45 types of their traditional musical instruments, and present a couple of tribal traditional dances also. To organize this band Anup traveled to all the corners of the area in adverse situation and convinced the artists about the aims of the band. He says that the credit really goes to all the members of the band who believed him and joined the group in extremely difficult and violence ridden conditions also, so that the show must go on. And thus the Bastar Band is disseminating the rich performing art traditions through out the country, and simultaneously making effort for salvage, creating awareness and sense of pride among their traditional bearers, and showcasing the real Bastar. ...