Monday, July 16

Author: bastarcg

जगदलपुर एवं देवी दंतेश्वरी का मंदिर

जगदलपुर एवं देवी दंतेश्वरी का मंदिर

Place to Visit, Temple
जगदलपुर छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर जिले का एक प्रसिद्ध शहर है यह इस जिले  मुख्यालय भी है  यहाँ का तापमान सामन्यतः कम ही होता है यहाँ अनेक दर्शनीय स्थल है यहाँ जगन्नाथ पीठ का भव्य मंदिर एवं देवी दंतेश्वरी का मंदिर है। जगदलपुर का दशहरा बहुत मशहूर है, जिसकी भव्यता देखते ही बनती है। इसे देखने के लिए देश विदेश से अनेक पर्यटक आते हैंजगदलपुर के आस-पास लगभग 40.00 किलोमीटर की दूरी पर चित्रकोट जलधारा, चित्रधारा, ताम्रघूमर, तीरथगढ़ आदि पर्यटन स्थल हैं जिनका प्राकृतिक सौंन्दर्य अपनी छटा इस प्रकार बिखरता है कि मन मुग्ध हो जाता है। देवी दंतेश्वरी का मंदिर जो यहाँ से लगभग 90.00 किलोमीटर की दूरी पर दंतेवाडा जिला में है। देवी दंतेश्वरी का मंदिर अपनी प्रसिद्व के लिए जाना जाता है। एेसा कहा जाता है कि यहाँ दर्शन करने से मुरादें पूरी हो जाती है और निवासियों का विश्वास अटल है  जगदलपुर को चैराहों का शहर भी कहा जाता

मावली माता का भव्य मंदिर जगदलपुर

Bastar Band, Place to Visit, Temple
माँ दंतेश्वरी मंदिर के पास ही उनकी छोटी बहन माँ भुनेश्वरी का मंदिर है। माँ भुनेश्वरी को मावली माता, माणिकेश्वरी देवी के नाम से भी जाना जाता है। माँ भुनेश्वरी देवी आंध्रप्रदेश में माँ पेदाम्मा के नाम से विख्यात है और लाखो श्रद्धालु उनके भक्त हैं। छोटी माता भुवनेश्वरी देवी और मांई दंतेश्वरी की आरती एक साथ की जाती है और एक ही समय पर भोग लगाया जाता है। लगभग चार फीट ऊंची माँ भुवनेश्वरी की अष्टड्ढभुजी प्रतिमा अद्वितीय है। मंदिर के गर्भगृह में नौ ग्रहों की प्रतिमाएं है। वहीं भगवान विष्णु अवतार नरसिंह, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं प्रस्थापित हैं। कहा जाता है कि माणिकेश्वरी मंदिर का निर्माण दसवीं शताब्दी में हुआ। संस्कृति और परंपरा का प्रतीक यह छोटी माता का मंदिर नवरात्रि में आस्था और विश्वास की ज्योति से जगमगा उठता है।
माँ दंतेश्वरी मंदिर का इतिहास

माँ दंतेश्वरी मंदिर का इतिहास

Bastar Band, Place to Visit, Temple, Uncategorized
छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर से करीब तीन सौ अस्सी किलोमीटर दूर दंतेवाडा नगर स्थित है। आंध्रप्रदेश के वारंगल राज्य के प्रतापी राजा अन्नमदेव ने यहां आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी और माँ भुवनेश्वरी देवी की प्रतिस्थापना की। वारंगल में माँ भुनेश्वरी माँ पेदाम्मा के नाम से विख्यात है। एक दंतकथा के मुताबिक वारंगल के राजा रूद्र प्रतापदेव जब मुगलों से पराजित होकर जंगल में भटक रहे थे तो कुल देवी ने उन्हें दर्शन देकर कहा कि माघपूर्णिमा के मौके पर वे घोड़े में सवार होकर विजय यात्रा प्रारंभ करें और वे जहां तक जाएंगे वहां तक उनका राज्य होगा और स्वयं देवी उनके पीछे चलेगी, लेकिन राजा पीछे मुड़कर नहीं देखें। वरदान के अनुसार राजा ने वारंगल के गोदावरी के तट से उत्तर की ओर अपनी यात्रा प्रारंभ की । राजा रूद्र प्रताप देव के अपने पीछे चली आ रही माता का अनुमान उनके पायल के घुँघरूओं से उनके साथ होने का अनुमान

शिवानी मंदिर कांकेर

Bastar Band, Place to Visit, Temple
शिवानी मंदिर, छत्तीसगढ़ राज्य में सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। यह मंदिर दुनिया भर मे एक लंबे समय के बाद पर्यटकों को आकर्षित किया है। मंदिर की संरचना निर्माण मे मंदिरों की प्राचीन शैली चित्रण और जातीय और पारंपरा को दर्शाता है। शिवानी मंदिर, कांकेर शिवानी मां मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। यह माना जाता है कि इस मंदिर में देवी के देवी, अर्थात् दुर्गा मां और मां काली का एक संयोजन है। कांकेर एक सुंदर शहर है जो कांकेर जिले में एक नगर पालिका है। कांकेर जिला छत्तीसगढ़ के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित है। जिले के माध्यम से पांच नदियों के प्रवाह है हतकुल नदी, महानदी नदी, तुरु नदी, सिन्दुर नदी और दूध नदी शामिल हैं। जिले की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। क्षेत्र की मुख्य फसल चावल है, और अन्य महत्वपूर्ण फसलें है गन्ना, चना, गेहूं, भुट्टा, मूंग, तिल्ली, और कोदो। कांकेर जिले के शिवानी मंदिर मे द

मलञ्झ्कुदुम झरना कांकेर

Bastar Band, Place to Visit, water fall
मलञ्झ्कुदुम झरना कांकेर की प्रमुख झरना है। कांकेर जिला छत्तीसगढ़ के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित है। यह पहले पुराने बस्तर जिले का एक हिस्सा है। पांच नदिया जिले कि प्रवाह के माध्य से गुजरती हैं। ये पांच नदिया महानदी नदी, तुरु नदी, सिन्दुर नदी, दूध नदी और हतकुल नदी हैं। जिले की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है और क्षेत्र की मुख्य फसल चावल है। क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण फसलें हैं - गन्ना, भुट्टा, चना, कोदो, मूंग, तिल्ली और गेहूं हैं। मलञ्झ्कुदुम झरना, छत्तीसगढ़ मे प्राचीन काल से एक सबसे खूबसूरत झरना रहा है। इस खूबसूरत झरना का एक बड़ा पैमाने है भीड़ खिचना और सदियों से पर्यटकों को आकर्षित करना। मलञ्झ्कुदुम झरना, जब उचाई से हवा का सीना फाड़ते हुए जमीन पर गिरता है वह बहोत ही देखनी होता है। इसकी ऊंचाई 10 मीटर से 15 मीटर और चौड़ाई 9 मीटर की हैं। भारत में कांकेर के मलञ्झ्कुदुम झरना दूध नदी पर कांकेर से
दुधवा बांध धमतरी छत्तीसगढ़

दुधवा बांध धमतरी छत्तीसगढ़

Bastar Band, Place to Visit
दुधवा बांध भारत में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित है। बांध का निर्माण 1953 में शुरू हुआ और 1964 में समाप्त हुआ। यह महानदी पर दुधवा गांव में बनाया गया है, सिहावा से 21 किमी और कांकेर से 29 किलोमीटर दूर है। बांध की ऊंचाई 24.53 मीटर और लंबाई 2,906.43 मीटर है। जलाशय में 625.27 वर्ग किमी का जलग्रहण क्षेत्र है। महानदी पूर्वी मध्य भारत की प्रमुख नदी है, जो छत्तीसगढ़ और ओडिशा राज्यों के माध्यम से बहती है।

भैरव मंदिर

Temple
मान्यता के मुताबिक साल में दो बार खुलने वाले भैरम मंदिर में टैक्स के रूप में अब नरबलि की जगह बकरे, मुर्गे की बलि दिए जानें के साथ ही चांवल की भेट दी जाती हैं. मंदिर में नरबलि का खौफ मंदिर के आसपास इस कदर दिखाई देता हैं कि पूरा मंदिर परिसर वीरान ही नजर आता है. केवल साल के दो दिन खुलने पर ही मंदिर की साफ सफाई होती हैं और पूजा पाठ करने के बाद शाम से पहले मंदिर बंद हो जाता है. भैरव मंदिर की सबसे बड़ी खासियत ये भी है कि इस मंदिर में विराजमान एक दर्जन देवी देवताओं को बस्तर दशहरा में जगदलपुर में आयोजित किए जानें वाले समारोह में स्थान नहीं दिया जाता है.सालभर में दो बार खुलने वाले भैरम मंदिर की खुलने की सूचना गांव का पुजारी 22 गांव को देता हैं, जिसमें लोग शामिल होते हैं. नरबलि के चलते भैरम मंदिर इलाकें में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा होता है. भैरब मंदिर के आसपास भी भयावता की कहानी आसपास के पेड़ों की
गंगा मुंडा झील

गंगा मुंडा झील

Place to Visit
बस्तर एक पर्यटक स्वर्ग है और एक बड़े आदिवासी आबादी का क्षेत्र है। बस्तर में, आप कई पहाड़ों, पहाड़ियों, पार्कों, गुफाओं के रूप में और अच्छी तरह से झरने भी देख सकते हैं। वास्तव में, बस्तर में झील और झरने इस जगह के पर्यटकों के आकर्षण का एक केंद्र माना जाता है। इस क्षेत्र का एक सबसे यादगार जगह है जो बहुत ही आकर्षण का केंद्र है गंगा मुंडा झील। बस्तर की गंगा मुंडा झील इंद्रावती नदी जो जगदलपुर के माध्य से गुजरता है पर स्थित है। गंगा मुंडा झील, जलीय मछली से अमीर, अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, और एक उल्लेखनीय पिकनिक स्पॉट है। यहां तक कि अगर आप कुछ शांतिपूर्ण क्षणों, शहर के कोलाहल जीवन से दूर व्यतीत करना चाहते हैं, तो यह झील आप के लिए सही जगह है जो आप को शांति का अनुभव दे गी। कई लोगों के लिए अपने दौरे के दौरान बस्तर का सुबह का धुंध और गंगा मुंडा झील के शांत शांत आनंद उन्हे बहोत ही पसंद

बस्तर पैलेस

Place to Visit
भारत के नक्शे में छत्तीसगढ़ राज्य का एक जिला जो रोचक और दुर्लभ दुनिया के पर्यटन के विकल्प और ऐतिहासिक पर्यटन पहलुओं से भारत को अच्छी तरह से जोड़ता है वह नाम है बस्तर। यहा का इतिहास एक प्रमुख भाग के लिए एक समय के विभिन्न बिंदुओं पर विभिन्न जनजातियों द्वारा संरचनाओं और स्मारक से भरा पड़ा है। यहा का बस्तर पैलेस सबसे अधिक लोकप्रिय और सुंदर पर्यटन स्थल है। बस्तर पैलेस एक और ऐतिहासिक अवशेष है जो जगदलपुर में देखा जाता है। यह बस्तर राज्य का मुख्यालय था। इसका निर्माण बस्‍तर राज्‍य के शासकों द्वारा कराया गया था, जब यह बस्‍तर साम्राज्‍य की राजधानी था और बाद में राजधानी बर्सुर से जगदलपुर स्‍थानांतरित हो गई। वर्तमान में बस्तर के शाही परिवार वहां रह रहे हैं।
Keshkal Ghati Bastar

Keshkal Ghati Bastar

Place to Visit
बस्तर की लाइफलाइन कही जाती है केशकाल घाटी। देश के बड़े हिस्से को बस्तर से जोड़ने वाला इकलौता रास्ता केशकाल से होकर जाता है। खूबसूरत वादियों से घिरी है केशकाल घाटी। ये केशकाल घाटी है, इस घाटी में दस अंधे मोड़ हैं, इस पर सफर जितना रोमांचक है उतना ही खतरनाक भी। अंधे मोड़ होने की वजह से यहां आए दिन हादसे होते हैं और आए दिन लोगों को जाम का सामना करना पड़ता है।यह घाटी अपने घुमावदार सड़को के लिए प्रसिद्ध है यह राष्ट्रिय राजमार्ग ३० में स्थित है बस्तर को भारत के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला रास्ता केशकाल घाटी से होकर गुजरता है केशकाल छत्तीसगढ़ राज्य के कोंडागांव जिले का प्रसिद्ध शहर है 1910 में अंग्रेजों ने इस घाटी पर सड़क बनवाई थी। -बस्तर और दक्षिण भारत से समूचे छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली इस अकेली सड़क पर है केशकाल घाटी। -इस घाट पर 2016 में ही 34 बार जाम लगा है क्योंकि सड़क-मोड़ संकरे हैं, लंबे ट्र